Wednesday, February 4, 2009

गुंडागर्दी

ये शीर्षक कुछ अटपटा है पर क्या करुँ बात भी अटपटी है बहुत। पिछले शुक्रवार को जयपुर में था। स्वाभाविक है जवाहर कला केन्द्र भी गया। वहां जो पर्दर्शनी लगी थी वह भी देखी। फ़िर कहवाघर में बैठा तो पिछले दिन घटी एक विचित्र घटना पर एक मित्र के साथ बात हुई। उस मित्र 'आसिफ भाई' का का कहना था कि कल यहाँ इन प्रदर्शनी वाले छात्र कलाकारों ने यहाँ एक इन्स्तालेशन भी किया था आतंकवाद के ख़िलाफ़। मगर एक वरिष्ठ कलाकार ने आकर इन बच्चों को फटकार लगे और जे के के के कारिंदों ने उनका इन्स्तालेशन कूडे॰ के हवाले कर दिया।
मुझे याद आया कि जब मैं स्कूल ऑफ़ आर्ट में छात्र था एक शिक्षक ने एक छात्र कलाकार के कैनवास फाड़ दिए थे। वह छात्र कलाकार संवेदनशील था। मेंटली disturb हो गया।
राजस्थान के कला जगत का दुर्भाग्य है कि यहाँ कुछ ऐसे लोग जिनका सच में कला से कोई वास्ता नहीं कलाकार बने बैठे हैं। संस्थानों व अकादमियों में घुसकर बहुत गुंडागर्दी की है इन लोगों ने। इन्हे कोई भी कला के थोड़ा नजदीक नज़र आता है ये बौखला जाते हैं। इन्हें अपनी दुकानदारी खतरे में नज़र आने लगती है।
और एक बात जब इन्हे लगता है की कांग्रेस की सरकार है ये कांग्रेसी हो जाते हैं। जब बी जे पी तो ये वहां नजदीकियां बढ़ाने लगते हैं। एक बार तो ये प्रगतिशील भी बन बैठे थे मंच हासिल करने के लिए। सच में हरामीपन है ये।
भगवान भी इन्हें अपने पास बुलाने से डर रहा है शायद...........

4 comments:

nidhi said...

kala jagat me jane kaisi kaisi gundagardiyaa hone lagi hain kuch log kala ke naam pr jo paros rhe hain vo bhu gundagardi hi hai

Unknown said...

SIR,barso baad jeevan ke pahle chitrakaar ki kuch tasveere dekh rha hu janta tha aap shant nhi baith sakte ,seene me dhadhkti aag kabhi samjhoto se bujhti h ,aap k chitra jehan me jeenda hai ,unme kuch tasveere aur jud gai aap se bhut seekha,alochana se lekar tikka-tippani ,fir se aap ki sharan me hu,
---------- PAnkaj "SAanidhya"
ur ex-student jnv kajra

संदीप said...

ऐसे लोगों का कला से कोई वास्‍ता नहीं होता मित्र, ये लोग तो माल तैयार करते हैं, और कुछ तो माल खुद तैयार भी नहीं करते, बल्कि दूसरे के माल की दलाली खाते हैं। लेकिन दिक्‍कत यह है कि जो लोग इन चीज़ों को समझ रहे हैं, वे एकजुट नहीं होते, और कई बात तो वे तब तक विरोध करते हैं, जब तक खुद उनका माल नहीं बिकने लगता।
वैसे एक बात कहना चाहता हूं, जब समाज में ही उथल-पुथल, गर्मी नहीं है तो कलाकार भी ठंडे ही होंगे वे समाज से कटे तो होते नहीं। लेकिन कलाकारों को ये चीज़ें समझ कर इनका विरोध करना चाहिए।

Anonymous said...

hello adig ji,radhe-radhe,kanhaji ki nagari mathura se govind sharma ki ex TGT [HINDI]jnv kajara persantly work in dept.of basic edu.[govt. of u.p.]--kaise hai aap.aaj apko fec book par dekh kar bahut accha laga.aapki chitrasutra web site bhi bahut acchi lagi .ajkal kaha ho .mujhe face book par contect kar sakate ho.meri email hai--itsgps.sharma@gmail.com.